
डॉ. सुधीर चौधरी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित
रुड़की। उत्तराखंड के प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर चौधरी को उनके चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देहरादून में आयोजित देवभूमि पीडियाट्रिक्स कॉन्फ्रेंस (पेडिकॉन-26) के दौरान एम्स की डायरेक्टर डॉ. मीनू सिंह द्वारा प्रदान किया गया।
डॉ. चौधरी ने वर्ष 1982 में मेरठ मेडिकल कॉलेज से पीडियाट्रिक्स में एमडी की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2013 में वे एफआईएपी (FIAP) हासिल करने वाले उत्तराखंड के पहले बाल रोग विशेषज्ञ बने। वे इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बोर्ड में उत्तराखंड से पांच बार सदस्य रह चुके हैं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास के लिए लगातार सराहनीय कार्य करते रहे हैं।
अपने करियर के दौरान डॉ. चौधरी ने 1985 से 1991 तक लीबिया के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, अल्जीबिल में पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने रोटरी क्लब रुड़की में अध्यक्ष, असिस्टेंट गवर्नर सहित विभिन्न पदों पर रहते हुए बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। वे अब तक 11 बार रोटरी इंटरनेशनल कन्वेंशन में भाग ले चुके हैं और हाल ही में रोटरी के मेडिकल मिशन के तहत मोज़ाम्बिक भी गए थे।
वर्तमान में डॉ. चौधरी रुड़की के देहरादून रोड स्थित चिरंजीव चाइल्ड हॉस्पिटल का संचालन कर रहे हैं, जहां वे आसपास के क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कई दशकों के अनुभव के साथ वे क्षेत्र में एक भरोसेमंद और प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं।
बच्चों की बीमारियों और डॉक्टर की भूमिका
बच्चों का स्वास्थ्य वयस्कों से अलग और अधिक संवेदनशील होता है। बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) विकसित हो रही होती है, इसलिए वे संक्रमण, वायरल बीमारियों, पोषण की कमी और एलर्जी जैसी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में एक बाल रोग विशेषज्ञ की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह बच्चों के संपूर्ण विकास का मार्गदर्शक भी होता है।
डॉ. चौधरी का मानना है कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर नियमित चेकअप, सही टीकाकरण और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। वे अभिभावकों को यह भी सलाह देते हैं कि बच्चों को जंक फूड से दूर रखें, उनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को शामिल करें और मोबाइल या स्क्रीन का उपयोग सीमित करें।
बच्चों की देखभाल कैसे करें
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार दें, जिसमें फल, सब्जियां और प्रोटीन शामिल हों।
समय पर टीकाकरण (वैकसीनेशन) करवाना न भूलें।
बच्चों की नींद पूरी हो, यह उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए जरूरी है।
स्क्रीन टाइम (मोबाइल/टीवी) को सीमित रखें और आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करें।
किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।
बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें, ताकि उनका मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहे।
डॉ. चौधरी का कहना है कि यदि अभिभावक और डॉक्टर मिलकर बच्चों की देखभाल करें, तो अधिकांश बीमारियों से बचाव संभव है और बच्चों का भविष्य स्वस्थ व उज्ज्वल बनाया जा सकता है।
