तीसरे नवरात्र पर जाने माँ चंद्रघंटा की विधिवत पूजा का विशेष महत्व,वर्षा माँ

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रूडकी हर्ष।
तीसरे नवरात्र पर मां चंद्रघंटा की विधिवत पूजा का विशेष महत्व, भक्तों को दी गई जानकारी

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है। इस अवसर पर रुड़की स्थित विचित्र प्राचीन शिव मंदिर की मुख्य पुजारन वर्षा माता ने भक्तों को मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और उसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वर्षा माता ने बताया कि मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांति, साहस और वीरता का प्रतीक है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा सुशोभित होती है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी आराधना से भक्तों के सभी भय दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
उन्होंने कहा कि तीसरे नवरात्रि के दिन विधिवत पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान मां को दूध, मिश्री और सफेद वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही, मां के मंत्रों का जाप और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।आपको बता दें कि देशभर में मंदिर में इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे है और मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर अपनी मनोकामना को पूर्ण करते हैं । वर्षा माता ने सभी भक्तों से अपील की है की वे पूरे श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करें, जिससे मां चंद्रघंटा की कृपा सदैव बनी रहे।


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