
जन्माष्टमी 2025: इस बार क्यों है विशेष
क्या योग बन रहे हैं जन्माष्टमी पर
जानिए आचार्य प्रवीन शास्त्री से
क्यों है इस बार जन्माष्टमी खास
15 अगस्त 2025, शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस बार योगायोग ऐसा बन रहा है कि अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और शुक्रवार का संगम होगा, जो अत्यंत शुभ और दुर्लभ है।
ऐसा संयोग लगभग 20-25 साल में एक बार आता है, जिसमें पूजन से अत्यंत पुण्य फल मिलता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
अष्टमी तिथि – श्रीकृष्ण जन्म का प्रतीक।
शुक्रवार – लक्ष्मी और प्रेम का दिन, जिससे भक्ति और वैभव दोनों प्राप्त होते हैं।
शुभ मुहूर्त – निशीथ काल में पूजन करने से जन्माष्टमी का पूर्ण फल मिलता है।
किन-किन चीजों का ध्यान रखना है
1. उपवास में सात्विकता रखें, केवल फलाहार लें।
रोहिणी नक्षत्र – भगवान कृष्ण का जन्म नक्षत्र, सौभाग्य और समृद्धि का कारक।
2. पूरे दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।
3. क्रोध, नकारात्मक बातें और विवाद से बचें।
4. पूजा में तुलसी पत्र, मक्खन और मिश्री अवश्य चढ़ाएं।
ग्रस्त जीवन में रहने वालों के लिए क्या रहेगा विशेष
जिनके जीवन में कलह, कर्ज या मानसिक तनाव है, वे इस दिन कृष्ण जी को पीतांबर, माखन-मिश्री और तुलसी पत्र अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप 108 बार करें।
इससे पारिवारिक शांति और मानसिक संतुलन में सुधार होगा।
बच्चों के लिए क्या रहेगा विशेष
बच्चों को बाल रूप में कृष्ण जी की लीलाएं सुनाएं, उन्हें माखन-मिश्री का प्रसाद दें और रात्रि में झूलन महोत्सव में भाग लेने दें।
यह बच्चों के व्यक्तित्व में प्रेम, सादगी और संस्कृति की जड़ें मजबूत करेगा।
जन्माष्टमी मनाने का सही तरीका
1. घर में श्रीकृष्ण का झूला सजाएं।
2. मध्यरात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म का अभिषेक करें।
3. माखन, मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचामृत से भोग लगाएं।
4. भजन-कीर्तन करें और आरती के बाद प्रसाद बांटें।
आखिर जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है
यह दिन भगवान कृष्ण के अवतरण का स्मरण है, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश किया।
उनकी लीलाओं से हम सीखते हैं कि जीवन में प्रेम, कर्तव्य और धर्म का संतुलन आवश्यक है।
कृष्ण जन्माष्टमी का हमारे जीवन पर प्रभाव
नकारात्मकता का नाश
प्रेम और संबंधों में मिठास
आर्थिक उन्नति के अवसर
मानसिक शांति और आत्मविश्वास
जन्माष्टमी में पैदा होने वाली संतान का योग
इस दिन जन्म लेने वाले बच्चों में आकर्षण, नेतृत्व क्षमता, बुद्धिमत्ता और कला का वरदान होता है।
वे जीवन में कठिन परिस्थितियों को भी सहजता से संभाल लेते हैं।
भूलकर भी यह कार्य न करें जन्माष्टमी पर
तामसिक भोजन न करें।
दूसरों का अपमान, झूठ और चुगली न करें।
पूजा में तुलसी पत्र के बिना भोग न लगाएं।
इस विशेष पूजा से मिटेंगे जन्म-जन्मांतर के कष्ट
श्रीकृष्ण अष्टोत्तर शतनाम” का पाठ कर, भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाकर, 108 दीपकों से आरती करने से पूर्व जन्मों के पाप कटते हैं और जीवन में नई शुरुआत का मार्ग खुलता है।
