
रुड़की शहर के मशहूर (शिक्षा शास्त्री) आचार्य प्रवीन शास्त्री
ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बार राधा अष्टमी में अनेकों अनेक दुर्लभ कार्यों से मिलेगी मुक्ति उन्होंने कहा कि राधा अष्टमी के बिना कृष्ण जन्माष्टमी अधूरी है राधा अष्टमी हमें प्रेम अनुसरण भाव एवं एक दूसरे के प्रति समर्पित होने का संदेश देता है रिश्तो की गरिमा और संकल्प मनुष्यों आदि का संदेश देने का काम करता है अर्थात जीवन प्रेम के बिना अधूरा है प्रेम ही हमें ईश्वर के साथ जोड़ने का काम करता है इसी संबंध में आज आचार्य प्रवीण शास्त्री ने कहा की
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ने वाली राधा अष्टमी का पर्व इस बार 31 अगस्त 2025, रविवार को देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। प्रेम और भक्ति की प्रतिमूर्ति श्रीराधा जी के प्राकट्य दिवस पर मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और झांकियों का आयोजन होगा।
श्रद्धालुओं का मानना है कि श्रीराधा जी की कृपा के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी है। इसी कारण इस दिन राधा नाम का स्मरण विशेष फलदायी माना जाता है।
ब्रजधाम, वृंदावन और बरसाना में राधा अष्टमी का विशेष महत्व है। यहां भव्य शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिरों में “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
धर्माचार्यों के अनुसार, राधा अष्टमी का संदेश है कि जीवन में सच्चा सुख और शांति निःस्वार्थ प्रेम तथा भक्ति से ही संभव है।
