
ईश्वर की प्राप्ति के लिए, व्यक्ति को सांसारिक इच्छाओं और मोह-माया का त्याग करना होता
(विश्व मानव उत्तराखंड हर्ष )
रूडकी।श्री बांके बिहारी गौशाला रुड़की के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन ढंडेरा नगर पंचायत हिमालय पैलेस में 13 अगस्त से लगाकर 19 अगस्त तक किया जा रहा है जिसमें सैकड़ो की संख्या में भक्तजन श्रीमद् भागवत कथा का रसपान ग्रहण कर रहे है।
कथा संयोजक श्री बांके बिहारी गौशाला के संचालक सर्वेश्वर दास द्वारा जानकारी दी गई
कथावाचक आचार्य योगेश्वर विजय सुन्दररियाल के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत कथा का गुणगान किया जा रहा है श्री बांके बिहारी गौशाला के संचालक सर्वेश्वर दास ने बताया कि पिछले बारह वर्षों से असहय गौ माता की सेवा की जा रही है और निरंतर प्रयास यह रहता है कि जो भी सड़कों पर भटकती हुई या फिर बीमार अवस्था मे गौ माता दिखाई देती है उनके उपचार और भोजन की व्यवस्था आप सभी के सहयोग से की जाती है उन्होंने बताया मेने अपने जीवन को धर्म और मानव सेवा और गौ माता के लिए समर्पित कर दिया है। और निरंतर प्रयास यही रहता है ज्यादा से ज्यादा गौ माता की सेवा के की जा सके ,उन्होंने कहा कि कथा हमें जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती है कथा का सुमिरन करने से जन्मो जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और जीवन में धर्म और आध्यात्मिक की स्थापना हो जाती है इसलिए हमें समय-समय पर कथा का स्मरण करते रहना चाहिए इसी उद्देश्य से लगातार वर्षों से देशभर में श्री बांके बिहारी गौशाला के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है.कथा व्यास आचार्य योगेश्वर विजय सुन्दररियाल ने मंच के माध्यम से श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से भक्त जनों को भगवान के बताए हुए सत: मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया उन्होंने कहा कि भगवान के चरणों से जुड़े रहना चाहिए वही है जो तुम्हारी हर विपदा को हर लेंगे। इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी उदय सिंह पुंडीर ने श्रीमद् भागवत कथा का रसपान ग्रहण कर अपने विचारों को व्यक्त किया और उन्होंने बताया कि श्रीमद भागवत कथा सभी वेदों का सार है. इसे सुनने से मनुष्य तृप्त होता है और जन्म जन्मांतर के पाप से मुक्त हो जाता है. साथ ही कथा सुनने या किसी भी शुभ काम को करवाने या करने के पीछे का उद्देश्य परम लक्ष्य की प्राप्ति ही होता इस मोके पर नरेश कुमार उर्फ गुड्डू भाई अनिल शर्मा संध्या राजपूत सोनू पाल लोकनाथ भारद्वाज प्रदीप कुमार मिश्रा आदि
