अंधकार से उजाले की ओर लेकर जाता है गुरु का ज्ञान हर्ष।

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रूडकी हर्ष ने किया गुरु के रूप में श्रीगोपाल नारसन का सम्मान रुड़की- वैदिक दर्शन में गुरू को एक चेतन देवता माना गया है। माता, पिता,पति, पत्नि,आचार्य इन सभी को चेतन देवता कहा गया है। मनुष्य के उपर इन पांचो देवताओं तथा जल, वायु ,अग्नि, वनस्पति आदि जड देवताओं का कर्ज होना माना गया है। आचार्य कर्ज मुक्ति के लिए उनके द्वारा दिये गए ज्ञान को जीवन में उतारना और दूसरो में बांटना जरूरी है। मनुष्य के लिए आवश्यक है कि सभी जड और चेतन देवताओं के साथ साथ आचार्य कर्ज भी इसी जीवन में उतारेे।जिसके लिए गुरू पूर्णिमा जैसे अवसरों पर गुरू दक्षिणा देकर गुरू पथगामी बना जा सकता है। इससे गुरू के प्रति श्रद्धा तो बढती ही है गुरू का आर्शीवाद भी अपने शिष्यों पर बना रहता है।
गुरू का भारतीय समाज में एक विशिष्ट स्थान है। गुरू ही बालक में संस्कार भरकर उसे एक ऐसा मनुष्य बनाता है जो संस्कारो, विधाओं और विचारो से परिपूर्ण हो। इस समाज को ऐसे ही गुरू की आवश्यकता है जो विधाविभूषितकर कल्याण के मार्ग का पथिक बना सके। ऐसे ही गुरू समाज को अपनी दिव्य ज्ञान ज्योति से प्रकाशमान करते है। गुरु पूर्णिमा पर गुरु के रूप में प्रसिद्ध साहित्यकार वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन का सम्मान करते हुए वरिष्ठ पत्रकार हर्ष ने उनसे आशीर्वाद लिया।सम्मान रूप में नारसन को पगड़ी व शाल ओढ़ाकर उनका अभिनन्दन किया गया।इस अवसर पर जाने पत्रकार सुधीर चावला पत्रकार राव सुहेब अख्तर अनुराधा शाहुल आदि मौजद रहे।


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