
श्रद्धा और विश्वास का पर्व है कावड़ मेला
रूडकी हर्ष।वर्षों से चली आ रही परंपरा आज भी अपनी संस्कृति और अपनी श्रद्धा के साथ बढ़ती चली जा रही है युग बदले लेकिन श्रद्धा और विश्वास आज भी अटूट है सावन मास में शुरू होने वाला कावड़ मेला देश का सबसे बड़ा मेला माना जाता है युतो तो भारतवर्ष में अनेकों ऐसे पर्व हैं जो देखने और सुनने में मिलते हैं भारत परंपराओं और विश्वास का देश है कावड़ मेला भोले भक्त पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते चले जाते हैं सैकड़ों मील का सफर अपने कंधों पर विश्वास की कावड़ लेकर भोले के जयकारों के साथ सफर पूरा करते हैं भोले भक्तों की सेवा के लिए लोगों में भी अच्छा खासा उत्साह नजर आता है कहीं पर भोले की सेवा के लिए चिकित्सा उपचार के लिए शिविर लगाया जाता है तो वही विशाल भंडारों का भी आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है जहां पर हजारों लाखों भोले भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं सड़क के दोनों किनारे छोटे-छोटे शिविर देखने को मिलेंगे जहां पर सेवा भाव से भोले भक्तों की सेवा की जाती है जल अभिषेक के उपरांत सड़कों की सफाई व्यवस्था भी चुस्त-दुरुस्त की जाती है ताकि पर्यावरण को भी बचाया जा सके इसी संबंध में रुड़की प्रेस क्लब पर पत्रकारों ने भोले भक्तों के लिए विशाल शिविर का आयोजन किया जिसमें भोले भक्तों के बैठने खाने और प्याऊ की व्यवस्था की गई कैंप में लगातार राजनेता समाज सेवी संस्थाएं सामाजिक कार्यकर्ता नित्य पधार कर अपनी श्रद्धा सुमन और भोले भक्तों की सेवा हेतु अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं भोजन दवाइयों की व्यवस्था आदि अनेकों ऐसे सुविधाएं कैंप में देखने को मिलेंगी इसी संबंध में मंगलवार को
सर्व समाज सेवा संगठन अध्यक्षा नीलम चौधरी समाज सेविका द्वारा अग्रसेन चौक (बोट क्लब) पर सावन के पहले सोमवार के दिन कावड़ियों हो फलाहार वितरित किए गए जहां पर सैकड़ों की संख्या में भोले भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया श्रद्धा और विश्वास से होती है ईश्वर की प्राप्ति भोले शंकर के जयकारों से चारों और अध्यात्म और परंपरागत तरीके से भोले की सेवा में जुटे लोग
