केंद्रीय विद्यालय 2 में बाल वाटिका 3 का आरंभ। स्कूल का पहला दिन बच्चों की मुस्कानों से प्रफुल्लित हुआ स्कूल।

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केंद्रीय विद्यालय 2 में बाल वाटिका 3 का आरंभ
प्रफुल्लित हुए अपना विद्यालय देखकर बच्चे !

रूडकी हर्ष।बाल वाटिका 3 के उद्घाटन के साथ ही आज केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 का प्रांगण नन्हे मुन्ने बच्चों की किलकारियों से गूंज उठा । केंद्रीय विद्यालय संगठन की अनूठी योजना ‘बालवाटिका’ के अंतर्गत आज केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रुड़की में बाल वाटिका के तीसरे संस्करण का आगाज़ हुआ । बच्चों को पहली कक्षा से पूर्व की शिक्षा देने के उद्देश्य के साथ यह योजना आरंभ की गई है । देश के सर्वोच्च वरीयता प्राप्त बाल शिक्षा संस्थान के रूप में केंद्रीय विद्यालय संगठन ने बालवाटिका के तीन संस्करणों को अपनी योजना में शामिल किया है । इनमें से बाल वाटिका 3 के लिए केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 रुड़की का चयन किया गया है । इसी योजना के अंतर्गत ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों के प्रवेश हेतु फॉर्म भरवाए गए थे जिनमें से केंद्रीय विद्यालय संगठन के मानकों के अनुसार 40 बच्चों का चयन बालवाटिका 3 के लिए किया गया ।


ज्ञातव्य है कि बाल वाटिका 3 के लिए बच्चों की आयु 5 से 6 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है इस योजना का मुख्य आकर्षण यह है कि इन बच्चों को विद्यालय में पुस्तकें आदि नहीं लानी होंगी बल्कि अपितु विद्यालय ही उन्हें अध्ययन की सामग्री उपलब्ध कराएगा । इतना ही नहीं बाल वाटिका 3 के अंतर्गत औपचारिक शिक्षा के बजाय ‘खेल खेल में शिक्षा’ पर बल दिया जाएगा जाता है और इन बच्चों का विद्यालय में रहने का समय भी केवल 3 घंटे निर्धारित किया गया है । वर्तमान में इन बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा 2 शिक्षकों चंद्रा राणा एवं ज्योति शर्मा को दिया गया है

विद्यालय के पहले दिन बच्चों ने प्राथमिक विभाग की प्रभारी शिक्षिका श्रीमती सविता वर्मा एवं अपनी शिक्षिकाओं के साथ विद्यालय के विभिन्न विभागों का भ्रमण किया जिसमें प्राथमिक विभाग के भवन के साथ-साथ माध्यमिक विभाग के भी पुस्तकालय, स्टाफरूम, प्राचार्य कक्ष, शौचालय एवं वाटर पॉइंट आदि बच्चों को दिखाए गए जिससे वे विद्यालय भवन से पूरी तरह परिचित हो सकें । बच्चों ने सर्वाधिक आनंद प्राथमिक विभाग में स्थित खेल के उपकरणों, झूलों, शीशॉ, मैरी गो राउंड व जिम आदि के उपकरणों के साथ लिया।

विद्यालय के प्राचार्य अरविंद कुमार ने बताया कि बच्चे प्राचार्य कक्ष में आकर बहुत प्रसन्न हुए और चॉकलेट पाकर तो वे फूले नहीं समाए । पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें विद्यालय में कोई डर नहीं लग रहा है तथा वे यहां भी घर जैसा ही अनुभव कर रहे हैं।


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