आचार्य लोकेश महाराज माँ गंगा के दर्शन मात्र से होती है हर मनोकामना पूर्ण

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रूडकी हर्ष। आज गंगा दशहरा के उपलक्ष में आज रुड़की शहर में जगह-जगह विशाल भंडारे का आयोजन किया गया वही स्थित सोलानी पार्क गंगा मंदिर पर भी भक्तजनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया प्रसाद ग्रहण कर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया गंगा दशहरा पर हरिद्वार मे भी दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा लेकर गंगा मैया के दर्शन को पहुंचे वही रुड़की में गंग नहर पुल समीप टेंट हाउस स्वामी व स्वयंसेवी संगठनों ने मिलकर विशाल भंडारे का आयोजन किया रुड़की गंगा मंदिर पर हर वर्ष की भांति विधिवत रूप से मां गंगा की पूजा की गई और विशाल भंडारे का आयोजन किया आध्यात्म और विधिवत रूप से मां गंगा के भक्तजनों ने दर्शन किए इस मौके पर समाजसेवी संजय अरोड़ा मास्टर दीपक कुमार लाखवान विजय शर्मा दीपक कैंथल अनुराग तिवारी मधुकर जाटव युवराज अंकित सैनी अंकुर सैनी सोनू कश्यप शिल्पी सैनी अर्जुन धीमान है राकेश कुमार धीमान ने भी कहां की मां गंगा के दर्शन मात्र से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है पवित्र पावनी मां गंगा मोक्ष का द्वार भी है इस मौके पर आचार्य लोकेश महाराज ने कहां की मां अपनी अपनी पवित्रता के लिए पूजी जाने वाली गंगा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी इसीलिए इस दिन को गंगा दशहरे के रूप में मनाया जाता है। अर्थात स्वर्ग से धरती पर गंगा के आने का पर्व है गंगा दशहरा। मां गंगा को संपूर्ण विश्व में सबसे पवित्र नदी माना जाता है।
जब गंगा धरती पर आई, तब यहां की बंजर धरती उपजाऊ हुई और हर क्षेत्र में हरियाली छा गई, तभी से यह गंगा दशहरा पर्व मनाने की शुरूआत हुई।
वराह पुराण के अनुसार मां गंगे 10 पापों को नष्ट करती है इसीलिए इसे दशहरा करते हैं।
गंगा दशहरे के उपलक्ष में घाटों पर मिलो का भी आयोजन किया जाता है भक्तजन दर्शन तदोपरांत बच्चों को खेल खिलौने और घर का सामान भी खरीदते हैं इसलिए बाजारों में भीड़ का माहौल रहता है
इस दिन गंगाजी अथवा अन्य किसी पवित्र नदी पर सपरिवार स्नान करना सर्वश्रेष्ठ होता है। यदि संभव न हो तब घर पर ही गंगाजली को सम्मुख रखकर गंगाजी की पूजा-आराधना कर ली जाती है मां गंगा माँ की अगर व्याख्या पूरी उम्र भी लिखे तो लिख नहीं सकते इसलिए मां गंगा को पवित्र रखना चाहिए क्योंकि मां गंगा ही मोक्ष का द्वार है


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