मूलनिवासी संघ की ओर से भारत रत्न डॉ.भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कवि सम्मेलन।

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देहरादून: मूलनिवासी संघ की ओर से मंगलवार देर शाम भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर रायपुर स्थित ब्लॉक सभागार में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने गीत और ग़ज़लों के माध्यम से समां बांधा और श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता मशहूर शायर इक़बाल आज़र ने की, जबकि संचालन महेंद्र कामा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत युवा शायर जावेद अहमद ने अपनी ग़ज़लों से की, जिसने माहौल को खुशनुमा बना दिया।
इसके बाद कुमार विजय द्रोणी ने बाबा साहेब को समर्पित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“वो शख़्स अंबर से ऊँचा था, वक़्त को जिसने थाम लिया,
लिख भारत के संविधान को, जग में अनूठा काम किया,
समझा था जिनको अछूत यहाँ, फ़लक़ तक उन्हें पहुँचाया है,
बाबा साहेब तुम जैसा भी, अद्भुत इंसान धरा पर आया है।”
उनकी इस प्रस्तुति ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।
प्रसिद्ध शायरा मोनिका मंतशा की ग़ज़ल—
“बदन के साथ जो रूह भी मेरी, मुझे नसीब वो बरसात हो नहीं पाई”—
को भी खूब सराहा गया।
शायर दर्द गढ़वाली ने अपनी ग़ज़ल—
“उनसे पूछो बीत रही है कितना उनके,
मेरा दुख तो हल्का है अडवानी से”—
पेश कर खूब दाद बटोरी।
अध्यक्षता कर रहे इक़बाल आज़र ने भी अपनी ग़ज़ल—
“जब तुम चाहो दिन हो जाए, जब चाहे रात करा दो,
सारे मोहरे पास तुम्हारे, जीत करा दो मात करा दो”—
से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके अलावा वरिष्ठ शायर बदरूद्दीन ज़िया, राही नहटौरी, दीपक अरोड़ा, सुशील चंद्र और महेंद्र कामा ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में रंग भर दिए।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।


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